हम इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं। (कड़ी निंदा सन्देश )

लांस नायक राघव यादव आतंकवाद के शिकार हो गए। कश्मीर में ड्यूटी पर कोई उन्नीस बीस साल के लौंडे ने गोलियों से छलनी कर दिया। बन्दूक उनके पास भी थी, पर उसको चलाने पर पाबंदी थी सरकार की तरफ से। इस से पहले कि ये समझ पाते कि सरकार जाये भाँड़ में, बन्दूक निकालो और गोली मारो, लड़के ने गोली चला दी थी। शहीद हो गए ।
सलामी के बाद शव को परिवार वालों को सौंप दिया गया। साथ में एक चिट्ठी भी थी जिसमें कुछ ऐसा लिखा था –

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A blunder of Poetry – Po’try

Bangalore got its own Poetry Festival this year. Considering the fact that the city has a strong and vibrant poetry community that thrives in the bookstores, cafes, and parks; a poetry festival was in fact due and perhaps should have even come earlier than now. The festival was liked by most of the attendants. I must most sincerely thank the organizers for such a Herculean effort.

There is one more thing that must be spoken about. A book was specially commissioned to be unveiled at the festival. Po’try was released as an anthology of poems that were shortlisted from the entries that were received in response to the poetry contest conducted as part of the festival. The entries were supposed to be in English, Hindi, or Kannada and required the number of lines to be more than 25. Continue reading “A blunder of Poetry – Po’try”

पिलपिलाते हुए आम लोग।

ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी में मुलाकातें भी होती रहतीं हैं। मुलाकातें होतीं हैं तो बातें भी चल पड़तीं हैं। हम हिन्दुस्तानी राय रखने में ऐसे भी बड़े आगे हैं। राजनीति, क्रिकेट, मज़हब, चलचित्र- आप बस मुद्दा उठाइये और चार पाँच विशेषज्ञ तो आपको राह चलते मिल जाएंगे। पान थूकते, तम्बाकू चुनाते, ताश खेलते विशेषज्ञ से शायद पाठक का भी पाला पड़ा ही होगा। तेंदुलकर को किस बॉल पर क्या मारना चाहिए, ये मेरे कॉलोनी के गार्ड से बेहतर शायद ब्रैडमैन को भी ना मालूम हो। Continue reading “पिलपिलाते हुए आम लोग।”