जो पुल बनाएंगे | Agyeya

कवि होते हैं। उनकी कृतियाँ होतीं हैं। कई कवियों की कृतियाँ कालजयी होती हैं। पर क्या ऐसा होता है कि किसी कवि की सभी कृतियाँ कालजयी होतीं होंं? नहीं। कई गणमान्य, सर्वसम्मानित कवियों ने भी बहुत सारी साधारण कृतियाँ रची हैं। कालजयी कृति की छाया में उनकी साधारण कृतियाँ भी अनमोल लगने लगतीं हैं।

Continue reading “जो पुल बनाएंगे | Agyeya”

Crime Vs. Politics

अपराध बनाम राजनीति।

अपराध क्या है? राजनीति क्या है? क्या दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं, या फिर पूरक हैं? अपराध के बिना राजनीति के क्या मायने हैं और राजनीति की अनुपस्थिति में अपराध के क्या मायने हैं? इन बातों पर सोच रहा हूँ। सुबह का समय है। बेंगलूर का मौसम अभी बेतुका सा है। वो जो बच्चा होता है घर में, जिसे किसी ने बताया नहीं कि मेहमान के आने पर क्या करना होता है, मौसम का हाल अभी कुछ वैसा ही है। बारिश हो रही है और नहीं भी। हैइसेंबर्ग साहब को यह मौसम ज़रूर भाता।

Continue reading “Crime Vs. Politics”

Jingoism Vs. Patriotism

Weekend mornings of an octoberish Bangalore can carry you into an inertia that is extremely difficult to overcome. However, this is a time loved and awaited by writers, poets, and patrons of literature for reasons transcending into the creative streak of such people. As such, this is perhaps the best time for a celebration like Bangalore Literature Festival to happen. When you have a Historian and Author as eminent as Ramachandra Guha to speak with you right in the morning, you can’t really ask for more. ‘Jingoism Vs. Patriotism’ has been a lingering debate for a long time in our society and has gained refreshed vitality in the recent times. Guha spoke on this subject. Continue reading “Jingoism Vs. Patriotism”