उलझते बंधन – Rakshabandhan Special

करीब १२-१३ बरस का था। नए पड़ोसी आये थे उस दिन। माँ ने मुझे उनकी मदद करने के लिए भेजा। एक ट्रक भर कर सामान था। काफी चीज़ें थीं। घर में उनके बस सिन्हा अंकल खुद, उनकी पत्नी और उनकी बेटी थी। आंटी और बेटी तो अंदर बैठ गए, सो मैंने और अंकल ने मिलकर सारा सामान उतारा और अंदर रखा। थालियाँ, चम्मच, मिक्सर ग्राइंडर – मुझसे तो यही उठ रहे थे। करीब तीन से चार घंटों में ये काम पूरा हुआ। अंकल ने अंदर आकर बैठने को कहा। यही सोचकर कि कुछ खाने पीने को मिलेगा, मैं अंदर बैठ गया।

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हम इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं। (कड़ी निंदा सन्देश )

लांस नायक राघव यादव आतंकवाद के शिकार हो गए। कश्मीर में ड्यूटी पर कोई उन्नीस बीस साल के लौंडे ने गोलियों से छलनी कर दिया। बन्दूक उनके पास भी थी, पर उसको चलाने पर पाबंदी थी सरकार की तरफ से। इस से पहले कि ये समझ पाते कि सरकार जाये भाँड़ में, बन्दूक निकालो और गोली मारो, लड़के ने गोली चला दी थी। शहीद हो गए ।
सलामी के बाद शव को परिवार वालों को सौंप दिया गया। साथ में एक चिट्ठी भी थी जिसमें कुछ ऐसा लिखा था –

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